इंडिया आईवीएफ के एक्सपर्ट के अनुसार आईवीएफ को सफल बनाने के लिए सर्वप्रथम दंपत्ति के लिए यह सबसे जरूरी है कि उन्हें अपनी सोच को हमेशा सकारात्मक बनाए रखना चाहिए।

आईवीएफ ट्रीटमेंट के दौरान डॉक्टरों के बताए गए नियमों एवं शर्तों का पूरी तरह से पालन करना चाहिए। डाइट प्लान तथा एक्सरसाइज को पूरी तरह से फॉलो करना चाहिए।

यह ऐसा बिल्कुल भी नहीं है कि यदि आपका आईवीएफ पहली बार फेल हो गया है तो आपको सफलता नहीं मिलेगी । आपको सफलता जरूर मिलेगी क्योंकि अब आधुनिक टेक्नोलॉजी बेस्ट आईवीएफ सेंटर, बेस्ट आईवीएफ क्लिनिक, एवं अच्छे डॉक्टर और एंब्रॉलजिस्ट इंडिया आईवीएफ में उपलब्ध है जिसके कारण आईवीएफ को पूरी तरीके से सफल बनाने की पूर्ण कोशिश की जाती है, जिससे आपका पहली बार में ही आईवीएफ सफल हो जाए।

इंडिया आईवीएफ क्लिनिक में सर्वप्रथम आईवीएफ फेल होने पर उसके कारणों एवं समाधान करने का प्रयास किया जाता है और उसके बाद आईवीएफ फेल होने का निवारण किया जाता है। ऐसा करने से आईवीएफ की सफलता दर की संभावना और अधिक बढ़ जाती है।

इन सभी उपायों के साथ साथ कुछ एडवांस टेक्नोलॉजी भी हैं जिसके द्वारा आईवीएफ की सफलता दर को और अधिक बढाया जा सकता है।

  • आई सी एस आई (ICSI) एक ऐसी पद्धति है जिसके माध्यम से एक अच्छे और स्वस्थ स्पर्म को अंडे के साथ साइटोप्लाज्म में इंजेक्ट किया जाता है, ऐसा करने से आईवीएफ की सफलता दर बहुत ही उच्च हो जाती है।
  • यदि महिला और पुरुष के अंडे और शुक्राणुओं की क्वालिटी अच्छी नहीं है तो डोनर का भी ऑप्शन होता है जिसे हम डोनर आईवीएफ कहते हैं इस विकल्प के साथ हम विचार कर सकते हैं की डोनर आईवीएफ में अगर अंडे की क्वालिटी अच्छी नहीं है तो अंडा एक महिला से डोनर ले सकते हैं और यदि शुक्राणु की क्वालिटी खराब है या फिर उसमें गति नहीं है तो ऐसी स्थिति में हम पुरुष डोनर से शुक्राणु भी ले सकते हैं इस पूरी प्रक्रिया को डोनर आईवीएफ कहते हैं।
  • इन सब एडवांस टेक्नोलॉजी में एक होती है अस्सिटेड हैचिंग जिसका प्रयोग हम एंब्रियो को प्रत्यारोपित करने से पहले करते हैं। अंडे की बाहरी परत जो जिसे ज़ोना पेलीसुडा़ कहां जाता है इसमें एक छोटा सा छिद्र कर दिया जाता है। यह छिद्र किसी केमिकल, लेजर या फिर मिक्रोमणिफुलटोर के माध्यम से किया जाता है। यह ऐसा इसलिए किया जाता है जिससे कि एंब्रियो को गर्भाशय में एकदम सही तरीके से स्थापित करने में सहायता प्राप्त होती है।
  • माइक्रोफ्लुइडिक्स स्पर्म सॉर्टिंग टेक्नोलॉजी उन शुक्राणुओं को फ़िल्टर करने में मदद कर सकती है जो सामान्य शुक्राणुओं से डीएनए क्षति को ले जाने की अधिक संभावना रखते हैं।
  • मैग्नेटिक एक्टिवेटेड सेल सॉर्टिंग (एमएसीएस) के माध्यम से शुक्राणुओं के घनत्व को बढाया दिया जाता है। इसके प्रयोग से शुक्राणु परिणामों में अच्छा सुधार देखने को मिलता है। MACS बांझपन को कम करके संतान प्राप्ति की संभावना को बढ़ाने में सहायक होता है।

इंडिया आईवीएफ नेशनल और इंटरनेशनल लेवल का एक बेस्ट फर्टिलिटी क्लीनिक है। यहां के प्रशिक्षित एवं योग्य डॉक्टर आईवीएफ ट्रीटमेंट के लिए पूरी तरह से सफल एवं सक्षम है। इंडिया आईवीएफ सेंटर में एडवांस टेक्नोलॉजी एवं एडवांस टूल्स के प्रयोग के द्वारा जांच की जाती हैं और यह जानकारी हमारे क्लीनिक में पूरी तरह से गुप्त रखी जाती है। इंडिया आईवीएफ ने अभी तक ना जाने कितने ही सफल आईवीएफ ट्रीटमेंट किए हैं जिसके द्वारा बहुत सारी महिलाओं को मां बनने का सुख प्राप्त हुआ है।

यदि आप या आपके किसी मित्र या रिश्तेदार में से कोई भी इनफर्टिलिटी जैसी समस्या से परेशान है तो अब परेशानी जैसी कोई बात नहीं है क्योंकि हम टेस्ट ट्यूब बेबी या आईवीएफ टेक्नोलॉजी के माध्यम से आप को संतान सुख दिलाने की पूरी कोशिश करते हैं और इसके लिए पूर्णता संकल्पित भी हैं।

https://www.indiaivf.in/आईवीएफ-फेल-होने-के-कारण/