इर्रिटेबल बाउलसिंड्रोम (अनियमित मलत्याग) / Irritable Bowel Syndrome (IBS)
इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS) एक आम बीमारी है और यह बड़ी आंत (large intestine) को प्रभावित करती है। इस समस्या से पीड़ित व्यक्ति को पेट में दर्द एवं मरोड़ होना, सूजन, गैस, कब्ज और डायरिया होना इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम (आईबीएस) के मुख्य लक्षण हैं। यदि लंबे समय तक इस समस्या की अनदेखी की जाए तो यह अधिक गंभीर हो सकती है। इर्रिटेबल बोवेल सिंड्रोम कई कारणों से होता है। माना जाता है कि जब कोलन अतिसंवेदनशील (hypersensitive) हो जाता है तो इसमें हल्की उत्तेजना शुरू होती है। जिसके कारण पेट में कब्ज हो जाता है या डायरिया शुरू हो जाती है। इसके अलावा कुछ एक्सपर्ट भोजन से हुए एलर्जी या कुछ विशेषप्रकार के भोज्य पदार्थों के प्रति कोलन का संवेदनशील होना भी इस समस्या का कारण मानते हैं। इसके अलावा भी इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम के कई कारण (cause,पाचन तंत्र के नसों में असामान्यता के कारण पेट में गैस बनता है जिसके कारण पेट में अधिक तनाव (stretches) उत्पन्न होता है और मल कड़ा हो जाता है। इसके कारण पेट में दर्द शुरू हो जाता है और भोजन भी आसानी से नहीं पच (digest) पाता। परिणामस्वरूप व्यक्ति को डायरिया भी होने लगती है।,र्रिटेबल बाउल सिंड्रोम होने पर कुछ लोगों के आंत में इम्यून सिस्टम की कोशिकाओं की संख्या बढ़ जाती है। इसी कारण से पेट में दर्द होता है और डायरिया होने लगती है।,आंत में बैक्टीरिया या वायरस की संख्या बढ़ जाने से पेट में हलचल (movement)
👉 इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम के लक्षणरू हो जाती है जिसके कारण व्यक्ति को इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम की समस्या हो जाती है।..पेट में कब्ज होना।
गंभीर रूप से डायरिया से पीड़ित होना। (और पढ़े – दस्त ठीक करने के घरेलू उपाय…)
कब्ज के साथ डायरिया भी होना।
पेट के निचले हिस्से में दर्द और मरोड़ होना, भोजन करने के बाद पेट में मरोड़ और दर्द अधिक बढ़ जाना।
पेट में अधिक गैस बनना और सूजन होना
सामान्य से अधिक पतला या सूखा मल (hard stool) निकलना।
पेट चिपक जाना।
पेट में अलग-अलग तरह से मरोड़ और दर्द होना।
मल में श्लेष्म (mucus) निकलना।
इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम से पीड़ित कुछ लोगों को पेशाब या यौन संबंधी (sexual issues) समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
। डॉक्टर आमतौर पर इस समस्या के लक्षणों को कम करने के लिए मरीज को अपनी जीवनशैली में कुछ बदलाव (changes in lifestyle) करने की सलाह देते हैं।
एक्सरसाइज तनाव को कम कर देता है इसलिए प्रतिदिन एक्सरसाइज करने से इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम (आईबीएस) की समस्या खत्म हो जाती है।
इस समस्या से पीड़ित होने के बाद हल्का भोजन (light food) करें, इससे यह समस्या काफी हद तक कम हो सकती है।
आंत को उत्तेजित करने वाले कैफीन युक्त पेय पदार्थ न पिएं।
फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ जैसे फल, सब्जियां, होल ग्रेन और अखरोट (nut) खाएं।
प्रतिदिन तीन से चार गिलास पानी पिएं और स्मोकिंग न करें।
कम मात्रा में पनीर (cheese) या दूध
प्रतिदिन तीन से चार गिलास पानी पिएं
रात में न जागें। अधिक जलपान। अधिक धूप का सेवन। अधिक व्यायाम या परिश्रम। मल-मूत्र रोकना। गुस्सा न करें । साथ ही गेहूं, उड़द, राजमा, मटर, गुड़, खटाई, मावा, मिठाई, दूध, सुपारी, नॉन-वेज, स्मोकिंग, तैलीय खाना, डब्बा बंद खाना,चोकलेट, एल्कोहल, गोभी, डेयरी उत्पाद, दूध, तले भुने मसालेदार पदार्थों एवं गेहूं से लक्षण बढ़ जाते हैं !.............आयुर्वेदिक उपचार- आयुर्वेद में IBS को ग्रहणी या संग्रहणी रोग के नाम से जाना जाता है। आयुर्वेद में ग्रहणी के वातज, पितज, कफज, सन्निपातज जैसे प्रकार बताये गए हैं तथा ग्रहणी रोग के कारणों, लक्षणों और चिकित्सा के बारे में विस्तार से वर्णन किया गया है।.....दोस्तों, उम्मीद है यहाँ दी गयी जानकारी से आपको लाभ मिलेगा .
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Answered2020-06-19 15:17:12
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