स्वर्णप्राशन संस्कार
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1 स्वर्णप्राशन क्या है - प्राचीनकाल से भारतवर्ष में बच्चो को बिमारिओ से बचाने का लिए आयुर्वेद के आनुभविक योग स्वर्णप्राशन का उपयोग किया जाता रहा है बच्चो के जन्म पश्चात होने वाले १६ संस्कार में स्वर्णप्राशन संस्कार का वर्णन शास्त्रो में मिलता है स्वर्णप्राशन स्वर्ण भस्म ,१० मेध्य आयुर्वेद औषध और ओजवर्धक औषध,गाय का घी और शहद का मिश्रण होता है
2.उम्र - १ माह से १६ वर्ष तक पुष्य नछत्र
3 लाभ –
• शरीर में रोगो से लड़ने वाली प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है
• बच्चो का शारीरिक विकास उम्र का अनुसार होता है
• मानसिक बुद्धि व् तार्किक क्षमता बढ़ती है
• बच्चो की पाचन प्रणाली को ठीक होती है
• त्वचा को पूरित करता है
• दांत की वृद्धि का दौरान होने वाले रोगो से बचाने में मदद करता है
• मौसम परिवर्तन में होने वाले रोगो से बच्चो को बचाता है
• बिस्तर में मूत्र त्याग (शैय्यामूत्र ) में लाभ करता है
• ओज को बढ़ाता है
• यह बच्चो की मानसिक रोगो,सिखने की क्षमता में परेशानी और सामान्य विकास में देरी होने पर मदद करता है
4 पुस्यनछत्र का योग – वेदो में स्वर्णप्राशन के लिए नक्षत्रो की स्थिति के अनुसार पुस्य नक्षत्र को इस क्रिया को करने का उपदेश दिया गया है जिस में औषध् का प्रभाव अधिक लाभदायी होता है
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