कई बार डिप्रेशन और डिप्रेशन के इलाज के बारे में पेशेंट को पता नहीं होता। अन्य मेडिकल बीमारियों की तरह डिप्रेशन को कई बार एक बीमारी नहीं माना जाता, और पेशेंट खुद को दोष देता है। इसमें इस बीमारी के स्वरूप का भी दोष है, क्योंकि डिप्रेशन में खुद को दोष देना, खुद को गलत मानना, 'सारी दुनिया की फसाद की जड़ मैं ही हूं' ऐसा समझना कई बार होता है। जिस प्रकार अगर किसी को टीवी की बीमारी हुई तो वह दुरुस्त होना चाहता है, इस प्रकार कई डिप्रेशन के पेशेंट दुरुस्त तो होना चाहते हैं, लेकिन उन्हें दवाइयों से होने वाले इलाज के बारे में बताया नहीं जाता। कई बार लोग उन्हें सिर्फ लेक्चर दे कर इंस्पायर करना चाहते है, जिससे यह बीमारी दुरुस्त नहीं होती।
Next Steps
अगर कभी कोई भी मरने के बारे में, या रोज-रोज की उदासी के बारे में आपसे बात करें, तो जरूर उसे साइकेट्रिस्ट के पास जाने के लिए कहिए।